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फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£ और लकà¥à¤·à¤£ जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आपको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिà¤
फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£ हलà¥à¤•े या गंà¤à¥€à¤° हो सकते हैं और उमà¥à¤° और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सहित विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कारकों के आधार पर à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हो सकते हैं। वायरस, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या कवक के कारण फेफड़ों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ से फà¥à¤²à¥‚ या सामानà¥à¤¯ सरà¥à¤¦à¥€ के समान लकà¥à¤·à¤£ हो सकते हैं। हालांकि, ये लकà¥à¤·à¤£ लंबे समय तक बने रह सकते हैं, जिससे à¤à¤• पà¥à¤°à¤—तिशील, दीरà¥à¤˜à¤•ालिक संकà¥à¤°à¤®à¤£ का मारà¥à¤— पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ होता है।
यहां कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ à¤à¤µà¤® रेखांकित लकà¥à¤·à¤£ दिठगठहैं जिनà¥à¤¹à¥‡ आप फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के दौरान महसूस कर सकते हैं।
गाढ़े बलगम के साथ लगातार खाà¤à¤¸à¥€
फेफड़ों और वायॠमारà¥à¤— के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से सूजन हो जाती है जिससे लगातार बलगम बन सकता है। उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ बलगम से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को तà¥à¤°à¤‚त खांसी आती है।
बà¥à¤°à¥‹à¤‚काइटिस और निमोनिया वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में, खांसने से à¤à¤• गाढ़ा बलगम निकलता है जिसका à¤à¤• अलग रंग हो सकता है जैसे सफेद, हरा, पीला-हरा, या यहाठतक कि साफ बलगम। गंà¤à¥€à¤° बà¥à¤°à¥‹à¤‚काइटिस के मामलों में खांसी कई हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक रह सकती है, à¤à¤²à¥‡ ही लकà¥à¤·à¤£ कम हो जाà¤à¤‚।
छाती में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ दरà¥à¤¦
खांसी और जà¥à¤•ाम वाले लोगों में सीने में दरà¥à¤¦ बहà¥à¤¤ आम है। यह खांसी और वायà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— की सूजन के कारण हो सकता है।
निमोनिया के मामलों में, सीने में दरà¥à¤¦ तेज, छà¥à¤°à¤¾ घोंपने और खांसने या सांस लेने के दौरान तेज हो सकता है। दरà¥à¤¦ पीठया ऊपरी पीठतक à¤à¥€ फैल सकता है।
बà¥à¤–ार
जब शरीर संकà¥à¤°à¤®à¤£ से लड़ रहा होता है तो शरीर का तापमान अपने इषà¥à¤Ÿà¤¤à¤® सà¥à¤¤à¤° 98.6 ° F (37 ° C) से बढ़ जाता है।
बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, वायरल या फंगल फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के दौरान, किसी को बà¥à¤–ार 105°F (40.5°C) तक हो सकता है। और किसी को à¤à¥€ 102°F (38.9°C) से अधिक बà¥à¤–ार होने पर लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देंगे, जैसे:
ठंड लगना,
पसीना आना,
मांसपेशियों में दरà¥à¤¦ या दरà¥à¤¦,
निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण,
कमज़ोरी,
सिरदरà¥à¤¦, और
शरीर मैं दरà¥à¤¦à¥¤
यदि आपको 102°F (38.9°C) से अधिक बà¥à¤–ार है और तीन दिनों से अधिक समय तक तेज बà¥à¤–ार रहता है, तो आपको डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
शरीर मैं दरà¥à¤¦
फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के दौरान मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और दरà¥à¤¦ होता है। और किसी को लगातार छाती और पीठमें दरà¥à¤¦ हो सकता है जिसे मायालगिया कहा जाता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठहै कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के दौरान मांसपेशियों में सूजन या सूजन हो जाती है, जिससे मांसपेशियों के आराम करने पर à¤à¥€ शरीर में दरà¥à¤¦ होता है।
à¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ या बहती नाक
बà¥à¤°à¥‹à¤‚काइटिस के दौरान नाक के मारà¥à¤— अकà¥à¤¸à¤° बलगम या कफ से à¤à¤° जाते हैं। इससे à¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ या बहती नाक हो सकती है जो फà¥à¤²à¥‚ जैसे लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से शà¥à¤°à¥‚ होती है- छींकना, सिरदरà¥à¤¦ और नाक में जलन।
सांस लेने में कठिनाई
सांस लेने में कठिनाई सांस की तकलीफ और अधूरी या à¤à¤¾à¤°à¥€ सांस लेने का कारण बन सकती है। यदि आपको सांस लेने में तकलीफ हो तो आपको ततà¥à¤•ाल चिकितà¥à¤¸à¤¾ सहायता लेनी होगी।
थकान या कमजोरी
à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£, विशेष रूप से छाती में संकà¥à¤°à¤®à¤£, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को सà¥à¤¸à¥à¤¤ या कमजोर महसूस करा सकता है। जब आपका शरीर संकà¥à¤°à¤®à¤£ से लड़ रहा हो तो आराम करना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
घरघराहट
घरघराहट तब होती है जब साà¤à¤¸ छोड़ते समय साà¤à¤¸ छोड़ने की गतिविधि सीटी, फà¥à¤«à¤•ार या à¤à¤¾à¤°à¥€ आवाज़ पैदा करती है। यह संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ वायà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— और सूजन के कारण हो सकता है। लंबे समय तक घरघराहट के लिठआपको à¤à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤° को देखने और दमा या à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की जांच करने या फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचने के लिठपूरी तरह से जांच करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ या होठों का नीला रंग
फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ या बà¥à¤°à¥‹à¤‚काइटिस के दौरान, वायॠमारà¥à¤— की सूजन और संकà¥à¤šà¤¨ से रकà¥à¤¤ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कम ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ का सेवन हो सकता है। रकà¥à¤¤ में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ के इषà¥à¤Ÿà¤¤à¤® सà¥à¤¤à¤° की कमी से तà¥à¤µà¤šà¤¾ और नाखूनों का रंग नीला पड़ सकता है।
फेफड़ों के आधार पर करà¥à¤•श आवाज
फेफड़ों का आधार गहरा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° है जो करà¥à¤•श या खड़खड़ाहट की आवाज निकाल सकता है, जिसे बिबासिलर कà¥à¤°à¥ˆà¤•लà¥à¤¸ à¤à¥€ कहा जाता है। ये फेफड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• हैं जो डॉकà¥à¤Ÿà¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¥à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप परीकà¥à¤·à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से पता लगा सकते हैं।
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